Sushruta Samhita |
Sushruta Samhita Hindi Book in PDF Download
Sushrutasamhita is the ancient Sanskrit text of Ayurveda and surgery. Sushruta Samhita is one of the three fundamental texts of Ayurveda. In the eighth century, this text was translated into Arabic by the name 'Kitab-e-Susrud'. The Sushruta Samhita has 186 chapters in which 1120 diseases, 700 medicinal plants, 64 procedures based on mineral sources, 57 procedures based on animal sources, and eight types of surgery are mentioned. Its author is Sushruta, who was born in Kashi in the 6th century BC. Sushruta Samhita is an important text of Brihadtrayi. This Samhita is considered to be the vast literature of surgery in Ayurveda literature. Kashiraj Dhanvantari is the preacher of Sushruta Samhita, and his disciple Acharya Sushruta has composed the entire Samhita in the form of a listener.
In this entire book, the main purpose of the treatment of diseases is surgery and school therapy. Acharya Dhanvantari was the first person to bring surgery to earth. Later, Acharya Sushruta wrote the teachings of the Guru in the form of Tantra and wrote a great book, which is illuminated like the Sun in the present world by the name of Sushruta Samhita. Acharya Sushruta was also well versed in Skin Planting systems (Plastic-Surgery). He was an expert in the simple art of removing cataracts in the eyes. The Sushruta Samhita is the first book of Shalytantra.
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सुश्रुतसंहिता आयुर्वेद एवं शल्यचिकित्सा का प्राचीन संस्कृत ग्रन्थ है। सुश्रुतसंहिता आयुर्वेद के तीन मूलभूत ग्रन्थों में से एक है। आठवीं शताब्दी में इस ग्रन्थ का अरबी भाषा में 'किताब-ए-सुस्रुद' नाम से अनुवाद हुआ था। सुश्रुतसंहिता में 186 अध्याय हैं जिनमें ११२० रोगों, ७०० औषधीय पौधों, खनिज-स्रोतों पर आधारित ६४ प्रक्रियाओं, जन्तु-स्रोतों पर आधारित ५७ प्रक्रियाओं, तथा आठ प्रकार की शल्य क्रियाओं का उल्लेख है। इसके रचयिता सुश्रुत हैं जो छठी शताब्दी ईसापूर्व काशी में जन्मे थे। सुश्रुतसंहिता बृहद्त्रयी का एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ है। यह संहिता आयुर्वेद साहित्य में शल्यतन्त्र की वृहद साहित्य मानी जाती है। सुश्रुतसंहिता के उपदेशक काशिराज धन्वन्तरि हैं, एवं श्रोता रूप में उनके शिष्य आचार्य सुश्रुत सम्पूर्ण संहिता की रचना की है।
इस सम्पूर्ण ग्रंथ में रोगों की शल्यचिकित्सा एवं शालाक्य चिकित्सा ही मुख्य उद्देश्य है। शल्यशास्त्र को आचार्य धन्वन्तरि पृथ्वी पर लाने वाले पहले व्यक्ति थे। बाद में आचार्य सुश्रुत ने गुरू उपदेश को तंत्र रूप में लिपिबद्ध किया, एवं वृहद ग्रन्थ लिखा जो सुश्रुत संहिता के नाम से वर्तमान जगत में रवि की तरह प्रकाशमान है। आचार्य सुश्रुत त्वचा रोपण तन्त्र (Plastic-Surgery) में भी पारंगत थे। आंखों के मोतियाबिन्दु निकालने की सरल कला के विशेषज्ञ थे। सुश्रुत संहिता शल्यतंत्र का आदि ग्रंथ है।
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सुश्रुतसंहिता | Sushruta Samhita | |
सुश्रुत संहिता download नहीं हो रहीं हैं
ReplyDeleteDownload ho rhi aap download button par click kre fir dusre page p apko Read online or niche download ka option mil jayega
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