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Wednesday, June 16, 2021

त्राटक साधना के चमत्कार हिंदी पीडीऍफ़ | Tratak Sadhana Ke Chamatkar Hindi PDF Book

 

त्राटक साधना के चमत्कार | Tratak Sadhana Ke Chamatkar

Tratak Sadhana Ke Chamatkar  Hindi Book in PDF Download

Tratak Sadhana Ke Chamatkar pdf free download, Tratak Sadhana Ke Chamatkar  Hindi pdf, Tratak Sadhana Ke Chamatkar book in Hindi pdf Free Download,  Tratak Sadhana Ke Chamatkar  Hindi PDF Download free as a result of yoga practice, many extraordinary abilities are attained by the seekers, they are called as Vibhuti or Siddhi. Some people have the belief that the episodes of the miracles of the life of yogis were added later by their superstitious disciples. It is not possible to tell them any relation with reality and it is difficult to solve them by the gross instruments of science. Dr. Hornack has written that it is not possible to have a miracle. Spinoza believes that nothing happens in nature that is contrary to its universal laws. Nevertheless, Hornack believes that supernatural events can happen in the world. In the opinion of Euler, Haller, Bonnet, etc., the occurrence of miracles is not impossible, yes, Breuer, the Dictionary of Merikils and Nicholson have mentioned many such incidents in Islamic Mysticism which prove the yogis of yogis.

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त्राटक साधना के चमत्कार हिंदी में किताब करें पीडीएफ में डाउनलोड

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Particulars

(विवरण)


 eBook Details (Size, Writer, Lang. Pages

(आकार, लेखक, भाषा,पृष्ठ की जानकारी)

 पुस्तक का नाम (Name of Book) 

त्राटक साधना के चमत्कार | Tratak Sadhana Ke Chamatkar

 पुस्तक का लेखक (Name of Author) 

चमनलाल गौतम / Chamanlal Gautam

 पुस्तक की भाषा (Language of Book)

 हिंदी (Hindi) 

 पुस्तक का आकार (Size of Book)

  36 MB

  कुल पृष्ठ (Total pages )

 146

 पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)

Adhyatm, Yoga



 


 


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सूर्यपुराण | Surya Puran in Hindi PDF Free

 

सूर्यपुराण | Surya Puran

Surya Puran Hindi Book in PDF Download

"This Purana is a collection of the meanings of all the Vedas. The form of Shuli Lord Shambhu is the supreme element. It is through him that the whole world pervades and by no one else, Aima Shruti has brought the bat. He is the soul of all beings and Jagadamba is the only one with the form of Chaitanya with Uma. He is the only one Shiva who is adorned in many forms by his pastimes. The same woman appears in the form of Brahma Vishnu in the midst of the gods. It was asked in the city that O God, who are you? At that time he said that I am the only one and there is no one else."

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सूर्यपुराण हिंदी में किताब करें पीडीएफ में डाउनलोड

"यह पुराण सभी वेदो के अर्थों की एक सग्रह स्वरूप है । शूली भगवान शम्भु का रूप ही परम तत्व है। उसके द्वारा ही यह समस्त विश्व व्याप्त है और किसी के द्वारा नही ऐमा श्रुति ने बत लाया है। वही समस्त भूतो की आत्मा हैं और जगदम्बा उमा के साथ एक मात्र चैतन्य स्वरूप वाले हैं। केवल वे एक शिव ही अपनी लीला से बहुत रूपो मे शोभित हुआ करते हैं। वही स्त्रय ब्रह्मा विष्णु के रूप में देवो के मध्य विराजमान दिखाई दिया करते हैं। एक बार ब्रह्मा आदि देवो द्वारा भगवान् शहर मे पूछा गया कि हे देव | आप कौन हैं ? उस समय उन्होंने कहा कि मैं एक ही है और अन्य कोई भी नहीं है । "

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(विवरण)


 eBook Details (Size, Writer, Lang. Pages

(आकार, लेखक, भाषा,पृष्ठ की जानकारी)

 पुस्तक का नाम (Name of Book) 

सूर्यपुराण | Surya Puran

 पुस्तक का लेखक (Name of Author) 

चमनलाल गौतम / Chamanlal Gautam

 पुस्तक की भाषा (Language of Book)

 हिंदी (Hindi) 

 पुस्तक का आकार (Size of Book)

  8 MB

  कुल पृष्ठ (Total pages )

 497

 पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)

Ved-Puran,sanskrit



 


 


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Sunday, April 4, 2021

ब्रह्मसूत्र उपनिषद एवं श्रीमद्भागवत डॉ वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी | Brahma Sutra Upanishad Evam Shri Bhagavata by Dr. Vasudev Krishna Chaturvedi

 

ब्रह्मसूत्र उपनिषद एवं श्रीमद्भागवत  डॉ वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी | Brahma Sutra Upanishad Evam Shri Bhagavata by Dr. Vasudev Krishna Chaturvedi


Brahma Sutra Upanishad Evam Shri Bhagavata Book in PDF Download

The Shrimad Bhagavat Puranas are called the Tilakarajas of the Puranas. After the creation of seventeen Puranas, Sri Ved Vyas has composed this Purana, Srimad Bhagavat is the shrine of the Vaishnavas, the glory of this Purana composed by Shri Shukukadevji Mukharavind is as much in the Sanskrit literature as in any other Puranaka. The commentaries of Srimad Bhagwat Purana are available in different languages, as there are no other Puranaki. Among the major Chari sects of India, Srimad Bhagwatka is very respectable. Due to the Triveni of Bhakti-Jnana-Vairagya, its renunciation is extremely virtuous and peaceful. The Vedas-Upanishads and Brahmasutraka in this one book, as it is coordinated, are rare elsewhere. Shrimad Bhagwat Puranaka Shravan is not possible by virtue of one birth, it is the statement of Shrivayas. Padmapuranaka is of the opinion


It is even written that one gets to hear this Purana by virtue of birth of some kind. What about humans? It is considered rare even to the gods. "Srimad Bhagavati Barta Suranamapi Durlabha". Acharyani considered it to be the unnatural commentary of the planetary formulas.


That is, this Purana is an annotation to explain the meaning of the Brahmasutras, Bharat is decisive of the Earth, Gayatrika is a commentary, Vedartha is an extension of Vedartha. Such a sentence is not found in relation to any other Puranas, so this excellent proof has been conferred upon it the status of pride. The meaning of "Srutyarthastu paave-pade" shrutis is in the post, in Sri Madhagavat, so this book is Indian and Mayaka Kanthar. Has been practiced and is therefore authentic, as a result, he did not comment like other masters, they consider it as 'unnatural means'. The trend towards such important landmarks is also a history.

By clicking on the link given below, you can download the written book Brahma Sutra Upanishad Evam Shri Bhagavata in PDF by Dr. Vasudev Krishna Chaturvedi


ब्रह्मसूत्र उपनिषद एवं श्रीमद्भागवत बुक करें पीडीएफ में डाउनलोड

श्रीमद्भागवत पुराणको पुराणोंका तिलकराज कहा जाता है । सत्रह पुराणों की रचनाके पश्चात् श्रीवेदव्यासने इस पुराणकी रचनाकी है, वैष्णवोंका कण्ठहार है श्रीमद्भागवत, श्रीशुकदेवजीके मुखारविन्दसे निः सृत इस पुराणकी महिमाका गान जितना संस्कृत साहित्यमें हुआ है, किसी अन्य पुराणका नहीं। श्रीमद्भागवत पुराण की जितनी टीकायें विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध हैं उतनी किसी अन्य पुराणकी नही हैं। भारतवर्ष के चारी प्रमुख सम्प्रदायोंमें श्रीमद्भागवतका अत्यन्त समादर है । भक्ति-ज्ञान-वैराग्यकी त्रिवेणीके कारण इसका अवगाहन परम पुण्य फलदायक एवं शान्तिप्रद है। इस एक ग्रन्थ में वेद-उपनिषद् और ब्रह्मसूत्रका जैसा समन्वय हुआ है अन्यत्र दुर्लभ है । श्रीमद्भागवत पुराणका श्रवण एक जन्मके पुण्यसे तो सम्भव ही नहीं है, ऐसा श्रीव्यासका कथन है । पद्मपुराणका मत है

"जन्मान्तरे भवेत् पुण्यं तदा वै भागवतं सभेत्"


यहाँ तक लिखा है कि कोटि जन्मके पुण्यसे यह पुराण सुननेको मिलता है । मनुष्योंकी तो बात ही क्या ? यह तो देवों को भी दुर्लभ माना गया है। "श्रीमद्भागवती बार्ता सुराणामपि दुर्लभा" । आचार्यनि इसे ग्रह्म सूत्रोंका अकृत्रिम भाष्य माना है


अर्थोऽयं ब्रह्मसूत्राणां भारतार्थ विनिर्णय : । गायत्री भाष्यरूपोऽसौ वेदार्थ उपवहित : ॥


अर्थात् यह पुराण ब्रह्मसूत्रोंका अर्थ बतलाने वाला भाष्य है, भारत अर्थका निर्णायक है, गायत्रीका भाष्य है, वेदार्थका विस्तार है । अन्य किसी पुराणके सम्बन्ध में ऐसा वाक्य नहीं मिलता अतः यही सर्वोत्कृष्ट प्रमाण इसे गौरव पद प्रदान करता रहा है। "श्रुत्यर्थस्तु पवे-पडे" श्रुतियोंका अर्थ तो पद-पद पर है श्री मदभागवत में अतः यह ग्रन्थ भारतीय वाङ मयका कण्ठहार है श्रीचेतन्यमहाप्रभुने ब्रह्मसूत्रोंपर] भाष्य नहीं लिखा उनकी मान्यता रही कि जिस ऋषि व्यासने ब्रहम सूत्रोंकी रूचना की है, उन्हीं की वाणी द्वारा श्रीमद् भागवत का प्रणयन हुआ है अतः प्रामाणिक ही है, फलतः उन्होंने अन्य आचार्यों की भांति भाष्य नहीं किया वे इसे - 'अकृत्रिम माध्य' मानते हैं। ऐसे महनीय ग्रन्धके विषयकी ओर प्रवृत्तिका भी एक इतिहास है।
नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके, आप  लिखित पुस्तक ब्रह्मसूत्र उपनिषद एवं श्रीमद्भागवत  हिंदी को   डॉ वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी   द्वारा पीडीएफ में डाउनलोड कर सकते हैं।


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 eBook Details (Size, Writer, Lang. Pages

(आकार, लेखक, भाषा,पृष्ठ की जानकारी)

 पुस्तक का नाम (Name of Book) 

 ब्रह्मसूत्र उपनिषद एवं श्रीमद्भागवत | Brahma Sutra Upanishad Evam Shri Bhagavata 

 पुस्तक का लेखक (Name of Author) 

 डॉ वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी |Dr. Vasudev Krishna Chaturvedi

 पुस्तक की भाषा (Language of Book)

 हिंदी (Hindi) 

 पुस्तक का आकार (Size of Book)

 254.1 MB

  कुल पृष्ठ (Total pages )

 415

 पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)

Hindi,Adhyatm



 

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Friday, March 5, 2021

वाल्मीकि रामायण - महर्षि वाल्मीकि | Valmiki Ramayan by Maharishi Valmiki

वाल्मीकि रामायण  | Valmiki Ramayan 

 

Valmiki Ramayan  Book in PDF Download

Ramayana is the most popular epic of Hinduism which is based on the life of Lord Rama, an incarnation of Vishnu. It is believed that Maharishi Val Meeki has not written the Ramayana on the life of Lord Rama.Valmiki ji originally composed this great Indian epic in Sanskrit. He has divided this Ram Katha into 7 sections.By clicking on the link given below, you can download the written book Valmiki Ramayana in PDF by Maharishi Valmiki.

वाल्मीकि रामायण किताब करें पीडीएफ में डाउनलोड

रामायण हिंदु धर्म का सबसे लोकप्रिय महाकाव्य है जो विष्णु के अवतार भगवान राम के जीवन पर आधारित है. यह माना जाता है कि भगवान राम के जीवन पर सबसे पहले महर्षि वाल्​मीकि ने नहीं रामायण की रचना की थी. वाल्मीकि जी ने मूल रूप से संस्कृत में इस महान भारतीय महाकाव्य की रचना की. उन्होंने 7 खण्डों में इस रामकथा को बांटा है

नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके, आप  लिखित पुस्तक वाल्मीकि रामायण को महर्षि वाल्मीकि द्वारा पीडीएफ में डाउनलोड कर सकते हैं।


Particulars

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 eBook Details (Size, Writer, Lang. Pages

(आकार, लेखक, भाषा,पृष्ठ की जानकारी)

 पुस्तक का नाम (Name of Book) 

 वाल्मीकि रामायण | Valmiki Ramayan 

 पुस्तक का लेखक (Name of Author) 

 महर्षि वाल्मीकि -Maharishi Valmiki 

 पुस्तक की भाषा (Language of Book)

 हिंदी (Hindi) 

 पुस्तक का आकार (Size of Book)

 2.1 MB

  कुल पृष्ठ (Total pages )

 134

 पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)

 धार्मिक / Religious,Hindi,




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Saturday, November 21, 2020

हरिवंश पुराण हिंदी रुपांतर : मज्जिनसेना चार्य | Harivansh Puran Hindi Rupanter : Majjinsenachariya

 हरिवंशपुराण हिंदी रूपांतर | Harivansh Puran Hindi Rupantar

हरिवंश पुराण हिंदी रुपांतर : मज्जिनसेना चार्य | Harivansh Puran Hindi Rupanter : Majjinsenachariya
  • पुस्तक का नाम/ Name of Book : हरिवंशपुराण हिंदी रूपांतर | Harivansh Puran Hindi Rupantar
  • पुस्तक के लेखकAuthor of Book : पं पन्नालाल जैन साहित्याचार्य / Pt. Pannalal Jain Sahityachary
  • पुस्तक की भाषा / Language of Book :हिंदी | Hindi
  • पुस्तक का साइज़ / Size of Book :  57.51 MB
  • कुल पृष्ठ /Total Pages : 512


     

    Thursday, October 22, 2020

    मार्क्सवाद : यशपाल | Marksvad In Hindi PDF |Yashpal Books

    मार्क्सवाद | Marxwad 

    मार्क्सवाद : यशपाल | Marxwad : Yashpal

     
  • पुस्तक का नाम/ Name of Book :मार्क्सवाद| Marxwad 
    • पुस्तक के लेखकAuthor of Book :  यशपाल| Yashpal
    • श्रेणी / Categories : history (इतिहास)
    • पुस्तक की भाषा / Language of Book Hindi (हिंदी)


       


      Monday, October 5, 2020

      हिंदी साहित्य का इतिहास | hindi sahitya ka saral itihas

      हिंदी साहित्य का इतिहास |  hindi sahitya ka saral itihas
      hindi sahitya ka saral itihas


      hindi sahitya ka saral itihas :हिंदी साहित्य का इतिहास  के बारे में जानकारी

      हिन्दी साहित्य के अब तक लिखे गए इतिहासों में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा लिखे गए हिन्दी साहित्य का इतिहास को सबसे प्रामाणिक तथा व्यवस्थित इतिहास माना जाता है। आचार्य शुक्ल जी ने इसे हिन्दी शब्दसागर की भूमिका के रूप में लिखा था जिसे बाद में स्वतंत्र पुस्तक के रूप में १९२९ ई० में प्रकाशित आंतरित कराया गया। आचार्य शुक्ल ने गहन शोध और चिन्तन के बाद हिन्दी साहित्य के पूरे इतिहास पर विहंगम दृष्टि डाली है।

      इतिहास-लेखन में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल एक ऐसी क्रमिक पद्धति का अनुसरण करते हैं जो अपना मार्ग स्वयं प्रशस्त करती चलती है। विवेचन में तर्क का क्रमबद्ध विकास ऐसे है कि तर्क का एक-एक चरण एक-दूसरे से जुड़ा हुआ, एक-दूसरे में से निकलता दिखता है। लेखक को अपने तर्क पर इतना गहन विश्वास है कि आवेश की उसे अपेक्षा नहीं रह जाती।

      आदिकाल से लेकर आधुनिक काल तक आचार्य शुक्ल का इतिहास इसी प्रकार तथ्याश्रित और तर्कसम्मत रूप में चलता है। अपनी आरम्भिक उपपत्ति में आचार्य शुक्ल ने बताया है कि साहित्य जनता की चित्तवृत्ति का संचित प्रतिबिम्बित होता है। इन्हीं चित्तवृत्तियों की परम्परा को परखते हुए साहित्य-परम्परा के साथ उनका सामंजस्य दिखाने में आचार्य शुक्ल का इतिहास और आलोचना-कर्म निहित है।

      इस इतिहास की एक बड़ी विशेषता है कि आधुनिक काल के सन्दर्भ में पहुँचकर शुक्ल जी ने यूरोपीय साहित्य का एक विस्तृत, यद्यपि कि सांकेतिक ही, परिदृश्य खड़ा किया है। इससे उनके ऐतिहासिक विवेचन में स्रोत, सम्पर्क और प्रभावों की समझ स्पष्टतर होती है।


    • पुस्तक का नाम/ Name of Book :हिंदी साहित्य का इतिहास |  hindi sahitya ka saral itihas
        • पुस्तक के लेखकAuthor of Book :रामचंद्र शुक्ल - Ramchandra Shukla



         

        Sunday, October 4, 2020

        तीसरा नेत्र – १ / Teesara Netra – 1 PDF Free Hindi Book by Arun Kumar Sharma

        तीसरा नेत्र – १ / Teesara Netra – 1 PDF Free Hindi Book by Arun Kumar Sharma
         Teesra Netra I 

        Teesra Netra I Arun Kumar Sharma pdf download :तीसरा - नेत्र |

        पुस्तक के संबंध में:-

        वर्तमान समय में स्व.म.म.डॉ. गोपीनाथ कविराज के पश्चात पिताश्री पं. अरूण कुमार शर्मा आध्यात्म चिंतक और तत्व दृष्टा के रूप में सर्वत्र प्रसिद्ध है। परम सौभाग्य की बात तो यह है कि वे अभी हम सब लोगों के बीच अपनी भौतिक सत्ता में विद्यमान हैं। अपने निवास पर प्रबुद्ध एवं आध्यात्मिक वर्ग के लोगों से प्रातः नित्य सायंकाल योग और तंत्र के गूढ़ और गोपनीय विषयों पर चर्चा किया करते हैं वह। आध्यात्मिक विशेषकर योग के प्रति मेरी शुरू से ही रूचि रही है, इसलिए कभी कदा अवसर प्राप्त होने पर सत्संग में भी अपनी जिज्ञासाओं के निमित्त उपस्थित हो जाया करता हूँ। एक दिन प्रसंगवश मैंने अपनी जिज्ञासा प्रकट की "योग" द्वारा मनुष्य का आत्मिक विकास कैसे सम्भव है?

        मेरी इस जिज्ञासा के समाधान में पिताश्री ने कहा भी अवस्थाएं हैं उनमें "योग" सर्वोच्च अवस्था है। वह अवस्था अति दुर्लभ हैं। मनुष्य की जितनी जिसे प्राप्त करने के लिए देवगण भी लालायित रहते हैं। वास्तव में योग ऐसी अवस्था है जिसे प्राप्त कर मनुष्य असम्भव से असम्भव कार्य कर सकने में समर्थ होता हैं। एक परम उच्च अवस्था प्राप्त सिद्ध योगी के लिए कुछ भी सम्भव नहीं हैं। क्योंकि वह ईश्वर से अभिन्न होता है। जैसे ईश्वर की शक्ति माया है, उसी प्रकार एक सिद्ध योगी की भी अपनी शक्ति होती है और वह उसी शक्ति का आश्रय लेकर असम्भव को सम्भव करता है। जो जितना ईश्वर का आदर्श प्राप्त करने में समर्थ है, वह उतना ही बड़ा योगी है। साधक और योगी में क्या अन्तर है?

        इस प्रश्न के उत्तर में पिताश्री ने कहा - जब तक वह माया को नियन्त्रित नहीं कर पाता - तब तक साधक है। माया को नियन्त्रित कर उस पर अधिकार प्राप्त कर लेने के पश्चात् वह योगी है। इसी को वीर भाव और दिव्य भाव कहते हैं। साधक वीर भावापन्न है जबकि योगी है दिव्य भवापन्न।

         बीसवीं शताब्दी के इस वैज्ञानिक युग में भी एक अत्यन्त रहस्यमय देश है तिब्बत। भारत की योग-तंत्र आदि प्राचीन विद्यायें भले ही लुप्त हो गयी हों काल के प्रवाह में पड़कर, लेकिन वे आज भी तिब्बत में गुप्त रूप से सुरक्षित हैं। इसमे सन्देह नहीं। भारत और तिब्बत का संबंध अति प्राचीन काल से है। सातवीं शताब्दी में तिब्बत के राजा का विवाह नेपाल और चीन की राजकुमारियों से हुआ था। दोनों देशों के राजकुमारियों के परिवार बौद्ध धर्मावलम्बी थे। पंचशील में विश्वास रखते थे। तिब्बत के राजा भी बौद्ध धर्म से प्रभावित हुए बिना न रह सके, परिणाम स्वरूप उन्होंने भी बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया। इतना ही नहीं बौद्ध धर्म को तिब्बत का राज धर्म भी घोषित कर दिया। यहाँ यह बतला देना आवश्यक है कि बौद्ध धर्म के पहले तिब्बत में 'वोन' धर्म प्रचलित था। जो भारतीय शैव धर्म का विकृत रूप था। तिब्बत में बौद्ध धर्म का प्रभाव धीरे-धीरे अपनी चरम सीमा पर पहुँचने लगा। उसी समय राजा द्वारा प्रेरित होकर तिब्बत के प्रकाण्ड विद्वान सम्भोत भारत आये और जब वापस तिब्बत लौटने लगे तो अपने साथ संस्कृत भाषा में लिपिबद्ध योग, तंत्र, ज्योतिष आदि विषयों से संबंधित बहुत से ग्रन्थ ले गये। और उनका अनुवाद तिब्बती लिपि में किया जो कश्मीर की शारदा लिपि जैसी है।


        • पुस्तक का नाम/ Name of Book :   तीसरा - नेत्र |Teesra Netra I 
        • पुस्तक के लेखक / Author of Book:   Arun Kumar Sharma 
        • श्रेणी / Categories:BhaktiHindu
        • पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी /hindi



         


         


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