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बृहज्जातकम् हिंदी पीडीएफ डाऊनलोड | Brihat Jatakam PDF Download


बृहज्जातकम्  हिंदी पीडीएफ डाऊनलोड | Brihat Jatakam  PDF Download

बृहज्जातकम्  हिंदी पीडीएफ डाऊनलोड | Brihat Jatakam  PDF Download

 बृहज्जातक या वराह का होराशास्त्र एक ऐसा वटवृक्ष है, जिसकी छाया में समस्त अवान्तर ज्योतिष साहित्य पुष्पित व समेधित हुआ है। इसके बिना ज्योतिष रूपी महासमुद्र में एक पग आगे बढ़ना भी दूभर है । इसे यह स्थान अनायास ही प्राप्त नहीं हुआ है, अपितु इसके प्रत्येक अक्षर में आचार्य वराहमिहिर ने विशेष प्रकार की अन्विति व तारतम्य रखकर इसे सर्वोत्कृष्ट तो बनाया ही है, साथ में अपने समय के विभिन्न मतमतान्तरों, सम्प्रदायों व विचारों में अपनी अलौकिक बुद्धि के बल से बड़े विचार पूर्वक समन्वय स्थापित करके, स्वयं निभ्भ्रान्त व दृढ़ मत पद्धति को प्रस्तुत किया है । इसी कारण यह वराहहोरा मानव आचार्यों (ऋषियों के अतिरिक्त) द्वारा रचित समस्त ज्योतिष साहित्य में मूर्धन्य स्थान रखती है और वराह मिहिर वास्तव में ज्योतिषशास्त्र स्थापक परमाचार्य' हैं।
भारतीय काव्य शास्त्र में जो महान् कार्य आचार्य मम्मट ने किया है, ठीक वही समन्वयात्मक पद्धति अपनाकर, भारतीय ज्योतिष के झंडे तले भिन्न ज्योतिषीय विचार धाराओं को लाने का भगीरथ कार्य आचार्य वराहमिहिर ने किया है ! गर्ग, पराशर, वशिष्ठ, नारद-प्रभूति तो ऋषि मुनि हैं लेकिन उपलब्ध विशाल साहित्य वाले ये अकेले ही आचार्य हैं ।
वराह की कुलपरम्परा : वराह मिहिर के पिता का नाम 'आदित्यदास' था । इन्होंने अपने पिता से ही ज्योतिष शास्त्र का बोध प्राप्त किया था । इसका उल्लेख स्वयं वराह ने ही किया है
'आदित्यदासतनयस्तदवाप्तबोधः ।
बहुत सम्भव है कि शास्त्रप्रवेश में अपने पिता से बोध प्राप्त कर उच्च श्रेणीक अध्ययनार्थ अन्य गुरुओं का सान्निध्य भी प्राप्त किया हो । पिता आदित्यदास इनके प्रारम्भिक गुरु या प्रेरक थे या सम्पूर्ण शास्त्राध्यापन कराने वाले गुरु, यह स्वष्टतया नहीं कहा जा सकता । हमारे विचार से कुल परम्परया आदित्यदास ने अपने पुत्र वराहमिहिर को ज्योतिष में प्रवृत्त करके उन्हें गति प्रदान की होगी, लेकिन वराह ने आगे चलकर प्रत्यक्ष सविता या सूर्य भगवान् को गुरु या परम गुरु माना था। अतः लौकिक व साक्षात् गुरु होते हुए भी सविता का गुरुत्व खण्डित नहीं होता सविता से प्रत्यक्ष वरदान व प्रसाद (कृपा) प्राप्त करने के बाद ही वराह मिहिर को अक्षय यश व अलौकिक कवित्व मिला होगा ।



पुस्तक का नाम/ Name of Book :  बृहज्जातकम्  | BRIHAT JATAKAM 
पुस्तक के लेखक/ Author of Book :  Suresh Chandra Mishra
श्रेणी / Categories :  Astrology
पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज़ / Size of Book : 642.3 MB
कुल पृष्ठ /Total Pages : 408



 
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