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Monday, May 1, 2023

गुनाहों का देवता फुल स्टोरी PDF | Gunaho Ka Devta Full Story Hindi Book PDF

 गुनाहों का देवता फुल स्टोरी pdf | Aghori Tantra PDF Download Free 

गुनाहों का देवता | Gunahon Ka Devta hindi pdf download
 Gunahon Ka Devta

गुनाहों का देवता  पीडीएफ में डाउनलोड करे 

धर्मवीर भारती द्वारा रचित 'गुनाहों का देवता सबसे बेहतर किताब है , इसे मैंने कम से कम 5 बार तो जरूर पढ़ी थी , जिन जिन लोगो ने पढ़ी सबको पसन्द आई , इस उपन्यास में एक अनोखा प्यार झलकता है ।

गुनाहों का देवता उपन्यास की गिनती हिंदी साहित्य जगत में उन रचनाओं में होती है जिन्होंने साहित्य की धारा को ही एक नया मोड़ दिया है। प्रथम प्रकाशन के 65 साल बाद भी यह सबसे ज्यादा मांग में रहने वालों उपन्यासों में से एक है ।इतने वर्ष के बाद भी अगर यह उपन्यास लोगों की निगाहों में बना हुआ है तो इसमें कुछ तो बात होगी और सचमुच प्रेम का इतना प्राकृतिक और वास्तविक वर्णन मैंने और कहीं नहीं पढ़ा और कहीं नहीं सुना। उपन्यास के शुरुआत में ही भारती जी कहते हैं कि "मेरे लिए इस उपन्यास का लिखना वैसा ही रहा है, जैसा पीड़ा के क्षणों में पूरी आस्था से प्रार्थना करना और इस समय भी मुझे ऐसा लग रहा है, जैसे मैं प्रार्थना मन ही मन दोहरा रहा हूं, बस।"

इस कहानी का ठिकाना अंग्रेज ज़माने का इलाहाबाद रहा है। कहानी के तीन मुख्य पात्र हैं : चन्दर , सुधा और पम्मी। पूरी कहानी मुख्यतः इन्ही पात्रों के इर्दगिर्द घूमती रहती है। चन्दर सुधा के पिता यानि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के प्रिय छात्रों में है और प्रोफेसर भी उसे पुत्र तुल्य मानते हैं। इसी वजह से चन्दर का सुधा के यहाँ बिना किसी रोकटोक के आना जाना लगा रहता है। धीरे धीरे सुधा कब दिल दे बैठती है, यह दोनों को पता नहीं चलता। लेकिन यह कोई सामान्य प्रेम नहीं था। यह भक्ति पर आधारित प्रेम था। चन्दर सुधा का देवता था और सुधा ने हमेशा एक भक्त की तरह ही उसे सम्मान दिया था। यह ‘विराटा की पद्मिनी’ के कुंजरसिंह और पद्मिनी की सदृश प्रेम था।

चन्दर पूरे समय आदर्शवादी बना रहा। उसे सदैव यह लगता था कि जिन प्रोफेसर ने उसे इतना प्यार दिया, अपने बेटे की तरह रखा उन्हीं की बेटी से अगर वह प्यार कर बैठता है तो उन पर क्या गुजरेगी। इसी उधेड़बुन में वह कभी तैयार नहीं हो पाता है। चन्दर के माध्यम से भारती जी ने एक मध्यम वर्ग के नौजवान की मानसिक स्थिति का वर्णन किया है जिसमें उसे सामाजिक और पारिवारिक अपेक्षाओं के आगे अपनी इच्छाओं की बलि देनी पड़ती है। साथ ही साथ प्रचलित मार्ग पर ही चलना पड़ता है, नए मार्ग पर चलने पर मानहानि का डर भी सताता रहता है। चन्दर हमेशा पसोपेश में रहता है कि क्या करना उचित रहेगा। चन्दर समाज के हर एक बंधन से बंधा था जो कि हमेशा उसे अपने मन की करने से रोक देते थे। यही एक गुनाह चन्दर ने किया था जिसके कारण वह गुनाहों का देवता हो गया था। चन्दर की लाचारी इन वाक्यों से ही झलकती है :

“कुछ नहीं बिनती! तुम कहती हो, सुधा को इतने अन्तर पर मैंने रखा तो मैं देवता हूँ! सुधा कहती है, मैंने अन्तर पर रखा, मैंने पाप किया! जाने क्या किया है मैंने? क्या मुझे कम तकलीफ है? मेरा जीवन आजकल किस तरह घायल हो गया है, मैं जानता हूँ। एक पल मुझे आराम नहीं मिलता। क्या उतनी सजा काफी नहीं थी जो सुधा को भी किस्मत यह दण्ड दे रही है? मुझी को सभी बचैनी और दु:ख मिल जाता। सुधा को मेरे पाप का दण्ड क्यों मिल रहा है?”

सुधा वासना में पड़े बिना प्यार का निश्छल प्रतीक थी। उसकी बातों में सामाजिक तानाबाना के प्रति उसकी अनभिज्ञता और उनसे आज़ाद होने की इच्छा साफ़ झलकती थी। लेकिन कभी भी उसने अपने देवता यानी चन्दर की इच्छा के विपरीत कुछ नहीं किया। उसकी मासूमियत, उसका भोलापन चन्दर की ताकत थे। उसका अल्हड़पन चन्दर से कोई संकोच नहीं रखता था। वह व्यवहारिक नहीं थी, वह हर चीज के लिए प्रश्न करती थी कि ऐसा क्यों नहीं है। चन्दर भी उसे क्या जवाब देता। जो चीज सदियों से चली आई है, उसमें वह क्या ही कर सकता था। सुधा कहती भी है कि,

"गलत मत समझो चन्दर! मैं जानती हूँ कि मैं तुम्हारे लिए राखी के सूत से भी ज्यादा पवित्र रही हूँ लेकिन मैं जैसी हूँ, मुझे वैसी ही क्यों नहीं रहने देते! मैं किसी से शादी नहीं करूँगी। मैं पापा के पास रहूँगी। शादी को मेरा मन नहीं कहता, मैं क्यों करूँ? तुम गुस्सा मत हो, दुखी मत हो, तुम आज्ञा दोगे तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ, लेकिन हत्या करने से पहले यह तो देख लो कि मेरे हृदय में क्या है?"

पम्मी आधुनिक ज़माने की युवती है। पम्मी के माध्यम से भारती जी ने समाज की घिनौनी सच्चाइयों को आवाज दी है। उसके वाक्यों के माध्यम से लेखक ने जाने कितनी सच्चाइयों को कह डाला है। उसके लिए प्रेम की परिणति संबंधों में ही हो सकती है, वह कहती भी है कि, "मैं जानती थी कि हम दोनों के संबंधों में प्रारंभ से इतनी विचित्रताएं थीं कि हम दोनों का संबंध स्थायी नहीं रह सकता था, फिर भी जिन क्षणों में हम दोनों एक ही तूफान में फंस गए थे, वे क्षण मेरे लिए मूल्य निधि रहेंगे।" उसके और चन्दर के संबंधों में किसी प्रकार के आदर्शों का स्थान नहीं था। और शायद इसीलिए चन्दर और पम्मी के संवाद आदमी की मन:स्थिति, आदर्श और व्यवहारिकता में द्वंद्व को बहुत अच्छे से पेश करते हैं।

पूरी पुस्तक में संवाद सराहनीय हैं। प्रेम की अलग अलग परिस्थितयों के द्योतक हैं और उन स्थितियों का मानसिक विश्लेषण भी करते हैं। एक मध्यम वर्ग की दुविधाओं को भारती जी ने अपनी कलम के माध्यम से बहुत ही खूबसूरती से कागज पर उकेरा है। घटनाओं का चुनाव बहुत ही सावधानी से किया गया है। ऐसी विचारोत्तेजक और कालजयी रचना दशकों में एक बार ही आती है।

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Particulars

(विवरण)


 eBook Details (Size, Writer, Lang. Pages

(आकार, लेखक, भाषा,पृष्ठ की जानकारी)

 पुस्तक का नाम (Name of Book) 

गुनाहों का देवता | Gunaho Ka Devta PDF

 पुस्तक का लेखक (Name of Author) 

धर्मवीर भारती / Dharamveer Bharati

 पुस्तक की भाषा (Language of Book)

Hindi

 पुस्तक का आकार (Size of Book)

3 MB

  कुल पृष्ठ (Total pages )

 214

 पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)

उपन्यास / Novel


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Tuesday, February 15, 2022

कुंवारी हवेली : प्रियांशी जैन द्वारा मुफ़्त पीडीऍफ़ पुस्तक हिंदी में | Kuwari Haveli By Priyanshi Jain PDF Book In Hindi Free

कुंवारी हवेली : प्रियांशी जैन द्वारा मुफ़्त पीडीऍफ़ पुस्तक हिंदी में | Kuwari Haveli By Priyanshi Jain PDF Book In Hindi Free Download

कुंवारी हवेली : प्रियांशी जैन द्वारा मुफ़्त पीडीऍफ़ पुस्तक हिंदी में | Kuwari Haveli By Priyanshi Jain PDF Book In Hindi Free Download

Some Excerpts From the Book Kuwari Haveli

Damini was lying alone in her room. As if sleep was far away from the eyes. Just closing my eyes was remembering the time gone by. She was 20 years old when she first stepped into this mansion by becoming the wife of Virbhadra Singh. So much has changed in the last 13 years. In the bygone years, this haveli had become a deserted mansion rather than a mansion.

Damini was the daughter of a nearby landowner. She was not much educated and had always grown up in the villages. His faith in God was too much. Always engrossed in worship. Never tried to ride, nor did he ever pay attention to himself. He had only 2 jobs in his life. take care of your family

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कुंवारी हवेली पुस्तक के कुछ अंश

दामिनी अपने कमेरे में अकेली लेटी हुई थी. नींद तो जैसे आँखो से कोसो दूर थी. बस आँखें बंद किए गुज़रे हुए वक़्त को याद कर रही थी. वो 20 साल की थी जब वीरभद्र सिंग की बीवी बन कर उसने इस हवेली में पहली बार कदम रखा था. पिच्छले 13 सालों में कितना कुछ बदल गया था. गुज़रे सालों में ये हवेली एक हवेली ना रहकर एक वीराना बन गयी थी.

दामिनी पास के ही एक ज़मींदार की बेटी थी. वो ज़्यादा पढ़ी लिखी नही थी और हमेशा गाओं में भी पली बढ़ी थी. भगवान में उसकी श्रद्धा कुछ ज़्यादा ही थी. हमेशा पूजा पाठ में मगन रहती. ना कभी बन सवारने की कोशिश की और ना ही कभी अपने अप्पर ध्यान दिया. उसकी ज़िंदगी में बस 2 ही काम थे. अपने परिवार का ख्याल रखना

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Particulars

(विवरण)


 eBook Details (Size, Writer, Lang. Pages

(आकार, लेखक, भाषा,पृष्ठ की जानकारी)

 पुस्तक का नाम (Name of Book) 

कुंवारी हवेली | Kuwari Haveli PDF

 पुस्तक का लेखक (Name of Author) 

प्रियांशी जैन / Priyanshi Jain

 पुस्तक की भाषा (Language of Book)

Hindi

 पुस्तक का आकार (Size of Book)

3 MB

  कुल पृष्ठ (Total pages )

 311

 पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)

उपन्यास / Novel


 


 


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Friday, January 28, 2022

गीतांजलि हिन्दी पुस्तक पीडीएफ डाउनलोड | Gitanjali Hindi Book PDF

गीतांजलि हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक | Gitanjali PDF Download Free 

गीतांजलि हिन्दी पुस्तक पीडीएफ डाउनलोड | Gitanjali Hindi Book PDF Download

Some Excerpts From the Book Gitanjali

The position of Dr. Sir Rabindra Nath is the highest among the present Indian literary figures. Among the ancient Indian poets, not only the whole country has bowed its head in front of your talent, but the whole world has bowed its head. “Aankh Ki Kirkiri”, “Nauka Hrivi”, “Gora”, “Ghar Bahari” thadi novels, “Naivedya”, “Kheya” etc. Poetry texts, “Raktkavari”, “Muktdhara” etc. has thanked. But the book that made Grapp famous all over the world, due to which the curse received a prize of Rs.1.25 lakh, the Nobel Prize, on which such great men as Bricks, Radenstein and Andrews were enchanted, and which is considered the best of all your books. That is "Gitanjali". We have compared Bangla Gitanjali with English Gitanjali. We can say that in many passages, Grazi Gitanjali Bangla is superior to Gitanjali. This book is the Hindi translation of the same Gitanjali. Rabindra Babu is a Bengali, and Vagla is a litterateur. But your English is so ornate and wondrous. Looking at it, you cannot say that it is not the language of a great gray writer. Again, Rabindra Babu's writing style is very awkward and full of rhetoric.

By clicking on the link given below, you can download the written book Gitanjali in PDF.

गीतांजलि पुस्तक के कुछ अंश

वर्तमान भारतीय साहित्यिकों में डाक्टर सर रवीन्द्र नाथ का स्थान सबसे ऊँचा है। श्रर्वाचीन भारतीय कवियों में केवल आपकी प्रतिभा के सामने सारे देश ने ही नहीं, किन्तु सारे संसार ने सिर झुकाया है। “आँख की किरकिरी”, “नौका हृवी”, “गोरा”, “घर बाहर” थादि उपन्यासों ने "नैवेद्य”, “खेया" आदि काव्य ग्रन्थों, “रक्तकवरी”, "मुक्तधारा" आदि नाटकों और अनेक लेखों और अख्यायिकाओं द्वारा थापने साहित्य का उपकार किया है। पर वह ग्रन्थ जिसने ग्राप को संसार भर में प्रसिद्ध कर दिया, जिसके कारण श्राप को सवा लाख रुपये का नोबिल प्राइज नामक पारितोषिक मिला, जिस पर ईंट्स, राधेन्सटेन और एन्ड्रयूज ऐसे महानुभाव मुग्ध हो गये, और जो आपके सारे ग्रन्थों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है, वह है "गीतान्जलि"। हमने बैंगला गीतान्जलि की तुलना अँग्रेजी गीतान्जलि से की है। हम कह सकते है कि कई श्रंशों में ग्रेजी गीतान्जलि बँगला गीतान्जलि से बढ़ी चढ़ी है । यह पुस्तक उसी गीतान्जलि का हिन्दी अनुवाद है। रवीन्द्र बाबू बंगाली हैं, और वॅगला साहित्यसेवी हैं। पर आपकी अंग्रेज़ी बडी अलंकृत और चमत्कारिक है। उसे देखकर आप नहीं कह सकते कि वह एक बड़े ग्रेज लेखक की भाषा नहीं है। फिर, रवीन्द्र बाबू की लेखनशैली बड़ी अटपटी और अलंकार पूर्ण होती है।

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 eBook Details (Size, Writer, Lang. Pages

(आकार, लेखक, भाषा,पृष्ठ की जानकारी)

 पुस्तक का नाम (Name of Book) 

गीतांजलि | Gitanjali PDF

 पुस्तक का लेखक (Name of Author) 

रबीन्द्रनाथ टैगोर / Rabindranath Tagore

 पुस्तक की भाषा (Language of Book)

Hindi

 पुस्तक का आकार (Size of Book)

3 MB

  कुल पृष्ठ (Total pages )

 132

 पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)

उपन्यास / Novel


 


 


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Thursday, January 13, 2022

पिंजर | Pinjar Novel Pdf by Amrita Pritam

पिंजर इन हिंदी | Pinjar Novel PDF Download Free 

पिंजर | Pinjar Novel Pdf by  Amrita Pritam

Pinjar Novel Book in PDF Download

It was cloudy day. The whole pea sitting on the piece of the sack was peeling. Opening the mouth of the flea caught in the fingers, when he tried to slide the grain in his fist, a white worm hit his thumb.

Just as suddenly a shudder rises in the mud filled pit, similarly the shiver ran all over Pooro's body, jerking his hand, threw the insect away and got his hands in his knees.

Pea pods, removed grains and empty peels were scattered in front of Pooro. He took hold of his liver by taking out both his hands from the middle of the joined Putno. He felt as if from head to toe his body was like that of a pea pod, inside which a worm was growing in place of clean grains of peas.

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पिंजर पीडीएफ में डाउनलोड करे 

मटमैला दिन था। बोरी के टुकडे पर बैठी पूरा मटर छोल रही थी। उँगलिया म पकडी हुई फ्ली के मुह का खोलकर जब उस ने दाना को मुट्ठी में सरकाना चाहा, तो एक सफेद कीडा उस के अँगूठे पर लग गया।

जैसे एकाएक कीचड भरे गड्ढे में पाव जा पडन पर एक सिहरन-सी हो उठती है, वैसी ही सिहरन पूरो के सारे शरीर मे दौड गयी हाथ झटकाकर उस न कीडे को परे फेंक दिया और अपने हाथो का अपने घुटनो म भीच लिया।

पूरो के सामने मटर की फलिया, निकाले हुए दाने और खाली छिलवे बिखरे पढे रहे। उस ने जोड़े हुए पुटनो के बीच म से दोनों हाथ निकालकर अपन कलेजे को थाम लिया। उसे लगा, मानो सिर से पाँव तक उस का शरीर मटर की उस फली की भाति हो जिसके भीतर मटर ने स्वच्छ दानो के स्थान पर कोई गा कीडा पल रहा है।

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 eBook Details (Size, Writer, Lang. Pages

(आकार, लेखक, भाषा,पृष्ठ की जानकारी)

 पुस्तक का नाम (Name of Book) 

पिंजर / Pinjar Novel  PDF

 पुस्तक का लेखक (Name of Author) 

अमृता प्रीतम / Amrita Pritam

 पुस्तक की भाषा (Language of Book)

Hindi

 पुस्तक का आकार (Size of Book)

12 MB

  कुल पृष्ठ (Total pages )

 760

 पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)

उपन्यास / Novel


 


 


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Friday, October 1, 2021

LITTLE WOMEN OR Meg, Jo, Beth, and Amy Book PDF in English by Louisa May Alcott

LITTLE WOMEN OR Meg, Jo, Beth, and Amy Book

LITTLE WOMEN OR Meg, Jo, Beth, and Amy Book in PDF Download

"Little Women" is a novel by American creator Louisa May Alcott (1832–1888), which was initially distributed in 1868 and 1869. Following the existences of the four March sisters — Meg, Jo, Beth and Amy — the original subtleties their entry from adolescence to womanhood and is inexactly founded on the creator and her three sisters. 

The original tended to three significant topics: home life, work, and genuine romance, every one of them related and every important to the accomplishment of its champion's singular personality. "Little Women" has been perused as a sentiment or as a journey, or both. It has been perused as a family show that approves uprightness over abundance, yet additionally as a method for getting away from that life by ladies who knew its  limitations very well indeed. 

Alcott made another type of writing, one that took components from Romantic youngsters' fiction and joined it with others from wistful books, coming about in an absolutely new configuration. 

Alcott composed two continuations of her well known work, the two of which likewise highlighted the March sisters: "Little Men" (1871) and "Jo's Boys" (1886).

By clicking on the link given below, you can download the written book LITTLE WOMEN OR Meg, Jo, Beth, and Amy Book in PDF.


Particulars

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 eBook Details (Size, Writer, Lang. Pages

(आकार, लेखक, भाषा,पृष्ठ की जानकारी)

 पुस्तक का नाम (Name of Book) 

LITTLE WOMEN OR Meg, Jo, Beth, and Amy PDF

 पुस्तक का लेखक (Name of Author) 

Louisa May Alcott

 पुस्तक की भाषा (Language of Book)

English

 पुस्तक का आकार (Size of Book)

24 MB

  कुल पृष्ठ (Total pages )

 84

 पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)

उपन्यास / Novel


 


 


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Tuesday, September 28, 2021

Little Women or Meg, Jo, Beth and Amy PDF in English

Little Women or Meg, Jo, Beth and Amy

Little Women or Meg, Jo, Beth, and Amy Brief description of the book:-

PLAYING PILGRIMS.

CHRISTMAS won't be Christmas without any pres- Cents, grumbled Jo, lying on the rug.

"It's so dreadful to be poor!" sighed Meg, looking down at her old dress.

"I don't think it's fair for some girls to have plenty of pretty things, and other girls nothing at all," added little Amy, with an injured sniff.

"We've got father and mother and each other," said Beth contentedly, from her corner.

The four young faces on which the firelight shone brightened at the cheerful words, but darkened again as Jo said sadly,-

"We haven't got father, and shall not have him for a long time." She did n't say "perhaps never," but each silently added it, thinking of father far away, where the fighting was.

Nobody spoke for a minute; then Meg said in an altered tone,-

"You know the reason mother proposed not having any presents this Christmas was because it is going to be a hard winter for every one; and she thinks we ought not to spend money for pleasure, when our men are suffering so in the army. We can't do much, but we can make our little sacrifices, and ought to do it gladly. 

By clicking on the link given below, you can download the written book Little Women or Meg, Jo, Beth and Amy  in PDF.


Particulars

(विवरण)


 eBook Details (Size, Writer, Lang. Pages

(आकार, लेखक, भाषा,पृष्ठ की जानकारी)

 पुस्तक का नाम (Name of Book) 

Little Women or Meg, Jo, Beth and Amy PDF

 पुस्तक का लेखक (Name of Author) 

Louisa May Alcott

 पुस्तक की भाषा (Language of Book)

English

 पुस्तक का आकार (Size of Book)

26 MB

  कुल पृष्ठ (Total pages )

 556

 पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)

Novel


 


 


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