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Tuesday, January 5, 2021

गृह विधान - सुभद्रा कुमारी चौहान | Grih Vidhan - Subhadra Kumari Chauhan

गृह विधान - सुभद्रा कुमारी चौहान | Grih Vidhan  - Subhadra Kumari Chauhan
गृह विधान | Grih Vidhan

 


पुस्तक का नाम/ Name of Book : गृह विधान | Grih Vidhan
पुस्तक के लेखक/ Author of Book : सुभद्रा कुमारी चौहान - Subhadra Kumari Chauhan
श्रेणी / Categories :  साहित्य / Literature
पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज़ / Size of Book : 62 MB
कुल पृष्ठ /Total Pages : 338




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बिखरे मोती - सुभद्रा कुमारी चौहान | Bikhre Moti - Subhadra Kumari Chauhan

बिखरे मोती - सुभद्रा कुमारी चौहान  | Bikhre Moti - Subhadra Kumari Chauhan
बिखरे मोती | Bikhre Moti


रूढ़ियों और सामाजिक बन्धनों की शिलाओं पर अनेक निर पराध आत्माएँ प्रतिदिन ही चूर चूर हो रही हैं । उनके हृदय बिन्दु जहाँ-तहाँ मोतियों के समान विखरे पड़े हैं । मैंने तो उन्हें केवल बटोरने का ही प्रयत्न किया है मेरे इस प्रयत्न में कला का लोभ है और अन्याय के प्रति क्षोभ भी। सभी मानवों के हृदय एक से हैं। वे पीड़ा से दुःखित, अत्याचार से रुष्ट और करुणा से द्रवित होते है । दुःख, रोप, और करुणा, किसके हृदय में नहीं हैं ? इसीलिए ये कहानियाँ मेरी न होने पर भी मेरी हैं, आपकी न होने पर भी आपकी और किसी विशेष की न होने पर भी सबकी हैं । समाज और गृहस्थी के भीतर जो घात, प्रतिघात निरंतर होते रहते हैं उनकी यह प्रतिध्रनियाँ मात्र हैं; उन्हें आपने सुना होगा। मैंने कोई नई बात नहीं लिखी है; केवल उन प्रतिध्वनियों को अपने भावुक हृदय की तंत्री के साथ मिलाकर ताल स्वर में बैठाने का ही प्रयत्न किया है।

हृदय के टूटने पर आंसू निकलते हैं, जैसे सीप के फूटने पर मोती । हृदय जानता है कि उसने स्वयं पिघल कर उन आंसुओं को ढाला है । अत: वे सच्चे हैं । किन्तु उनका मूल्य तो कोई प्रेमी ही बतला सकता है । उसी प्रकार सीप केवल इतना जानती है कि उसका मोती खरा है; वह नहीं जानती कि वह मूल्यहीन है अथवा बहुमूल्य । उसका मूल्य तो रत्नपारिखी ही बता सकता है। अतएव इन 'बिखरे मोतियों का मूल्य कलाविद् पाठकों के ही निर्णय पर निर्भर है।

मुझे किसी के सामने इन्हें उपस्थित करने में संकोच ही होता था परन्तु श्रद्धेय श्री० पदुमलाल पुन्नालाल जी बख्शी के आग्रह और प्रेरणा ने मुझे प्रोत्साहन देकर इन्हें प्रकाशित करा ही दिया, जिसके लिए हृदय से तो मैं उनका आभार मानती हूँ किन्तु साथ ही डरती भी हूँ कि कहीं मेरा यह प्रयत्न हास्यास्पद ही न सिद्ध हो ।

सुभद्राकुमारी चौहान


पुस्तक का नाम/ Name of Book : बिखरे मोती | Bikhre Moti
पुस्तक के लेखक/ Author of Book : सुभद्रा कुमारी चौहान - Subhadra Kumari Chauhan
श्रेणी / Categories :  साहित्य / Literature
पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज़ / Size of Book : 17.43 MB
कुल पृष्ठ /Total Pages : 209




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फूलों का गुच्छा - सुभद्रा कुमारी चौहान | Phoolon Ka Guccha - Subhadra Kumari Chauhan

फूलों का गुच्छा - सुभद्रा कुमारी चौहान| Phoolon Ka Guccha  - Subhadra Kumari Chauhan
फूलों का गुच्छा | Phoolon Ka Guccha

 

पुस्तक का नाम/ Name of Book : फूलों का गुच्छा | Phoolon Ka Guccha
पुस्तक के लेखक/ Author of Book : सुभद्रा कुमारी चौहान - Subhadra Kumari Chauhan
श्रेणी / Categories :  काव्य / Poetry
पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज़ / Size of Book : 3 MB
कुल पृष्ठ /Total Pages : 65




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दो सखियाँ - सुभद्रा कुमारी चौहान | DO SAKHIYAN - Subhadra Kumari Chauhan

दो सखियाँ  - सुभद्रा कुमारी चौहान | DO SAKHIYAN - Subhadra Kumari Chauhan
दो सखियाँ | DO SAKHIYAN

 

पुस्तक का नाम/ Name of Book : दो सखियाँ | DO SAKHIYAN
पुस्तक के लेखक/ Author of Book : सुभद्रा कुमारी चौहान - Subhadra Kumari Chauhan
श्रेणी / Categories :  काव्य / Poetry
पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज़ / Size of Book : 986 KB
कुल पृष्ठ /Total Pages : 9




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जलियाँवाला बाग़ में बसंत - सुभद्रा कुमारी चौहान | JALIYANWALA BAGH MEIN VASANT - Subhadra Kumari Chauhan

जलियाँवाला बाग़ में बसंत  - सुभद्रा कुमारी चौहान | JALIYANWALA BAGH MEIN VASANT - Subhadra Kumari Chauhan
जलियाँवाला बाग़ में बसंत | JALIYANWALA BAGH MEIN VASANT

 

पुस्तक का नाम/ Name of Book : जलियाँवाला बाग़ में बसंत | JALIYANWALA BAGH MEIN VASANT
पुस्तक के लेखक/ Author of Book : सुभद्रा कुमारी चौहान - Subhadra Kumari Chauhan
श्रेणी / Categories :  काव्य / Poetry
पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज़ / Size of Book : 71 KB
कुल पृष्ठ /Total Pages : 2




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कदम्ब का पेड़ - सुभद्रा कुमारी चौहान | KADAMB KA PED - Subhadra Kumari Chauhan

कदम्ब का पेड़  - सुभद्रा कुमारी चौहान | KADAMB KA PED - Subhadra Kumari Chauhan
कदम्ब का पेड़ | KADAMB KA PED

 

पुस्तक का नाम/ Name of Book : कदम्ब का पेड़ | KADAMB KA PED
पुस्तक के लेखक/ Author of Book : सुभद्रा कुमारी चौहान - Subhadra Kumari Chauhan
श्रेणी / Categories :  काव्य / Poetry
पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज़ / Size of Book : 73 KB
कुल पृष्ठ /Total Pages : 2




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खूब लडी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी - सुभद्रा कुमारी चौहान | KHOOB LADI MARDANI WO TO JHANSI WALI RANI THI - Subhadra Kumari Chauhan

खूब लडी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी - सुभद्रा कुमारी चौहान | KHOOB LADI MARDANI WO TO JHANSI WALI RANI THI - Subhadra Kumari Chauhan
खूब लडी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी | KHOOB LADI MARDANI WO TO JHANSI WALI RANI THI

 

पुस्तक का नाम/ Name of Book : खूब लडी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी | KHOOB LADI MARDANI WO TO JHANSI WALI RANI THI
पुस्तक के लेखक/ Author of Book : सुभद्रा कुमारी चौहान - Subhadra Kumari Chauhan
श्रेणी / Categories :  काव्य / Poetry
पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज़ / Size of Book : 102KB
कुल पृष्ठ /Total Pages : 4




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मुकुल - सुभद्रा कुमारी चौहान | Mukul - Subhadra Kumari Chauhan

मुकुल - सुभद्रा कुमारी चौहान | Mukul  - Subhadra Kumari Chauhan
मुकुल | Mukul

 सुभद्रा कुमारी चौहान (१६ अगस्त १९०४-१५ फरवरी १९४८) हिन्दी की सुप्रसिद्ध कवयित्री और लेखिका थीं। उनके दो कविता संग्रह तथा तीन कथा संग्रह प्रकाशित हुए पर उनकी प्रसिद्धि झाँसी की रानी (कविता) के कारण है। ये राष्ट्रीय चेतना की एक सजग कवयित्री रही हैं, किन्तु इन्होंने स्वाधीनता संग्राम में अनेक बार जेल यातनाएँ सहने के पश्चात अपनी अनुभूतियों को कहानी में भी व्यक्त किया। वातावरण चित्रण-प्रधान शैली की भाषा सरल तथा काव्यात्मक है, इस कारण इनकी रचना की सादगी हृदयग्राही है।इन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया। विवाह के पश्चात भी राजनीति में सक्रिय भाग लेती रहीं। दुर्भाग्यवश मात्र 43 वर्ष की अवस्था में एक दुर्घटना में इनकी मृत्यु हो गई। इनकी रचनाएँ हैं- 'मुकुल (कविता-संग्रह), 'बिखरे मोती (कहानी संग्रह), 'सीधे-सादे चित्र और 'चित्रारा। 'झाँसी की रानी इनकी बहुचर्चित रचना है। इन्हें 'मुकुल तथा 'बिखरे मोती पर अलग-अलग सेकसरिया पुरस्कार मिले


पुस्तक का नाम/ Name of Book : मुकुल | Mukul
पुस्तक के लेखक/ Author of Book : सुभद्रा कुमारी चौहान - Subhadra Kumari Chauhan
श्रेणी / Categories :  काव्य / Poetry
पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज़ / Size of Book : 2 MB
कुल पृष्ठ /Total Pages : 142




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