Thursday, March 4, 2021

विक्रमोवर्शी - कालिदास | Vikramovarshi by Kalidas

विक्रमोवर्शी - कालिदास | Vikramovarshi by Kalidas
विक्रमोवर्शी | Vikramovarshi

 विक्रमोवर्शी किताब करें पीडीएफ में डाउनलोड

विक्रमोर्वशीयम् कालिदास का विख्यात नाटक। यह पांच अंकों का नाटक है। इसमें राजा पुरुरवा तथा उर्वशी का प्रेम और उनके विवाह की कथा है।नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके, आप विक्रमोर्वशी लिखित पुस्तक को कालिदास द्वारा पीडीएफ में डाउनलोड कर सकते हैं।

Vikramovarshi Book in PDF Download

The famous play of Vikramorvashiyam Kalidas. It is a five-digit drama. It narrates the love of Raja Pururava and Urvashi and their marriage.By clicking on the link given below, you can download the book written Vikramovarshi by Kalidas in PDF.


Particulars

(विवरण)


 eBook Details (Size, Writer, Lang. Pages

(आकार, लेखक, भाषा,पृष्ठ की जानकारी)

 पुस्तक का नाम (Name of Book) 

 विक्रमोवर्शी | Vikramovarshi

 पुस्तक का लेखक (Name of Author) 

 कालिदास -Kalidas

 पुस्तक की भाषा (Language of Book)

 हिंदी (Hindi) 

 पुस्तक का आकार (Size of Book)

 1.3 MB

  कुल पृष्ठ (Total pages )

 149

 पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)

 नाटक/ Drama




 ॥ सूचना ॥
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ध्यान योग बुक करें डाउनलोड | DHYAN YOG BOOK IN HINDI PDF

Dhyan Yog book in hindi pdf Download | ध्यान योग बुक करें डाउनलोड


ध्यान योग बुक करें डाउनलोड | DHYAN YOG BOOK IN HINDI PDF


 Dhyan Yog book in hindi pdf |ध्यान योग के बारे में संक्षिप्त विवरण

ध्यान योग प्राचीन भारत की अमूल्य निधि है. ध्यान योग के माध्यम से व्यक्ति अपने आत्मा और शरीर दोनों को स्वस्थ बना सकता है. हिन्दु धर्म में ध्यान का बहुत महत्व है. भगवान श्री कृष्ण ने गीता में ध्यान योग के बारे ​में विशद् विश्लेषण किया है. उनके इस विश्लेषण बहुत सी मीमांसाए और भाष्य लिखे गए है. समय के साथ ध्यान की अलग—अलग विधियां भी विकसित हुई है, जिनमें ध्यान योग सर्वाधिक लोकप्रिय है. आचार्य रजनीश जिन्हें ओशो के नाम से प्रसिद्धि मिली. उन्होंने ध्यान योग को पश्चिमी दुनिया में लोकप्रिय बनाने का कार्य किया. यहां उपलब्ध करवाई जा रही पुस्तक उनके द्वारा ध्यान योग पर दिए गए प्रवचनों को संग्रहित कर बनाया गया है. नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप इस पुस्तक के पीडीएफ वर्जन को डाउनलोड कर सकते हैं।

Dhyan Yog Book Review in hindi

Meditation Yoga is the priceless fund of ancient India. Through meditation yoga, a person can make both his soul and body healthy. Meditation is of great importance in Hinduism. Lord Shri Krishna has done a detailed analysis of meditation yoga in the Gita. Many of his speeches have been written and analyzed in this analysis. Over time, different methods of meditation have also been developed, in which meditation yoga is the most popular. Acharya Rajneesh, who got fame in the name of Osho. They did the work of popularizing meditation yoga in the Western world. The book being provided here is designed by collecting the discourses given on meditation Yoga. By clicking on the link below, you can download the PDF version of this book.

अभिज्ञान शाकुन्तल - कालिदास | Abhigyan Shakuntala by Kalidas

अभिज्ञान शाकुन्तल - कालिदास | Abhigyan Shakuntala by Kalidas
अभिज्ञान शाकुन्तल | Abhigyan Shakuntala 

 अभिज्ञान शाकुन्तलम् का हिंदी अनुवाद pdf

अभिज्ञान शाकुन्तलम् महाकवि कालिदास का विश्वविख्यात नाटक है ‌जिसका अनुवाद प्रायः सभी विदेशी भाषाओं में हो चुका है। इसमें राजा दुष्यन्त तथा शकुन्तला के प्रणय, विवाह, विरह, प्रत्याख्यान तथा पुनर्मिलन की एक सुन्दर कहानी है।

Abhigyan Shakuntalam PDF Download

It contains a beautiful story of love, marriage, marriage, reprisal and reunion of King Dushyant and Shakuntala. 
Abhigyan Shakuntalam is a world-famous drama by Mahakavi Kalidas, which has been translated into almost all foreign languages. 

कुमारसम्भव - कालिदास | Kumarsambhav by Kalidas

कुमारसम्भव - कालिदास | Kumarsambhav by Kalidas
कुमारसम्भव  | Kumarsambhav

Kumarsambhav by Kalidas Hindi PDF Download | कुमारसम्भव - कालिदास हिन्दी पीडीएफ डाऊनलोड 

कुमारसम्भवम् (अर्थ : 'कुमार का जन्म') महाकवि कालिदास विरचित कार्तिकेय के जन्म से संबंधित महाकाव्य जिसकी गणना संस्कृत के पंच महाकाव्यों में की जाती है। नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके, आप कालिदास द्वारा लिखित पुस्तक कुमारसम्भव को पीडीएफ में डाउनलोड कर सकते हैं।

Kumarasambhavam (meaning: 'Birth of Kumar') related to the birth of Mahakavi Kalidasa Virchita Karthikeya epic which is counted in the Panch epics of Sanskrit.
By clicking on the link given below, you can download the book  Kumarsambhav written by Kalidas in PDF.

Wednesday, March 3, 2021

No Longer Human By Osamu Dazai PDF in English

No Longer Human by Osamu Dazai
No Longer Human 

No Longer Human by Osamu Dazai Summary:

"No Longer Human" by Osamu Dazai is a captivating literary masterpiece that delves into the depths of human existence, offering a poignant portrayal of the human condition. In this SEO-friendly book summary, we explore the profound themes and timeless relevance of Dazai's work, now available in PDF format.

The novel follows the tumultuous life of Yozo, a troubled protagonist who grapples with a profound sense of alienation and disconnect from society. Dazai skillfully navigates Yozo's journey, exposing the raw vulnerabilities and complex emotions that lie beneath his façade of humor and wit.

"No Longer Human" tackles universal themes such as identity, belonging, and the quest for meaning. Through Yozo's introspective narration, Dazai provides a searing critique of societal norms, exploring the pressures to conform and the consequences of living inauthentically.

Dazai's evocative prose and deeply introspective storytelling captivate readers, inviting them to reflect on their own struggles and vulnerabilities. The novel's exploration of existential angst and the search for authentic connection resonates with readers across generations.

With the convenience of the PDF format, readers can easily access and immerse themselves in Dazai's thought-provoking narrative. "No Longer Human" continues to be a celebrated literary work, inspiring discussions on the complexities of human nature and the masks we wear to hide our true selves.

Whether you are a literature enthusiast, a student exploring existentialist literature, or simply seeking a profound reading experience, "No Longer Human" by Osamu Dazai in PDF format offers a convenient way to engage with this timeless classic.

Discover the depth and power of Dazai's exploration of the human psyche as you delve into the pages of "No Longer Human." Download the PDF and embark on a journey of self-reflection, empathy, and the pursuit of authenticity in a world that often masks our true nature.

Name of Book: No Longer Human
 
Author of Book: Osamu Dazai

Categories : साहित्य / Literature

 Language of Book: English

Size of Book: 6.4 MB

Total Pages : 183

Tuesday, March 2, 2021

रोगानुसार आसन व प्राणायाम : हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक | Roganusar Aasan Va Pranayam : Hindi PDF Book

 

रोगानुसार आसन व प्राणायाम : हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक  | Roganusar Aasan Va Pranayam : Hindi PDF Book

Roganusar Aasan Va Pranayam : Hindi PDF Book | रोगानुसार आसन व प्राणायाम : हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक

Monday, March 1, 2021

सत्यार्थ प्रकाश : स्वामी दयानन्द | Satyartha Prakash : by Swami Dayanand

सत्यार्थ प्रकाश : स्वामी दयानन्द द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – ग्रन्थ | Satyartha Prakash : by Swami Dayanand Hindi PDF Book – Granth

 सत्यार्थ प्रकाश : स्वामी दयानन्द द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक | Satyartha Prakash : by Swami Dayanand Hindi PDF Book 

सत्यार्थ प्रकाश : स्वामी दयानंद | Satyarth Prakash : Swami Dayanand | के बारे में अधिक जानकारी : 

आर्यसमाज के प्रवर्तक महर्षि दयानन्द ने आपकी सेवा में प्रस्तुत 'सत्यार्थप्रकाश' नामक ग्रन्थ की रचना करके मानव जाति का अवर्णनीय रा' उपकार किया है । सत्य का ग्रहण और असत्य का परित्याग करना ही इस ग्रन्थ का मुख्य उद्देश्य है, और यही सब सुधारों का मूल सूत्र है । अतः महर्षि ने इस ग्रन्थ की भूमिका में लिखा है-"सत्य उपदेश के विना अन्य कोई भी मनुष्य जाति की उन्नति का कारण नहीं है ।" वह सत्य-उपदेश मनुष्यकृत अनार्ष ग्रन्थों में प्राप्त नहीं होता जिस से मानव-जीवन का कल्याण हो सके । हितकारी, प्रामाणिक एवं महत्त्वपूर्ण विषयों का अति सरलता से प्रतिपादन आर्ष ग्रन्थों में ही उपलब्ध होता है । तृतीय समुल्लास में उल्लिखित आर्ष ग्रन्थों के अध्ययन से लाभ और अनार्ष ग्रन्थों के अध्ययन से हानि पर अवश्य ध्यान देना चाहिए जो जिज्ञासु आर्ष ग्रन्थों में गोता लगाता है । वह अवश्य ही बहुमूल्य मोतियों को प्राप्त करके अपना जीवन सफल बना सकता है।
महर्षि की अनुपम रचना सत्यार्थप्रकाश का संक्षिप्त परिचय निम्न है
(१) इसी ग्रन्थ में ब्रह्मा से लेकर जैमिनि मुनि पर्यन्त ऋषि-मुनियों के वेद प्रतिपादित सारभूत विचारों का संग्रह है। अल्प विद्यायुक्त, स्वार्थी, दुराग्रही लोगों ने जो वेदादि सच्छास्त्रों के मिथ्या अर्थ करके उन्हें कलंकित करने का दुःसाहस किया था, उन के मिथ्या अर्थों का खण्डन और सत्यार्थ का प्रकाश अकाट्य युक्तियों और प्रमाणों से इस में किया गया है। किसी नवीन मत की कल्पना इस ग्रन्थ में लेशमात्र नहीं है।
(२) वेदादि सच्छास्त्रों के अध्ययन विना सत्य ज्ञान की प्राप्ति सम्भव नहीं। उनको समझने के लिए यह ग्रन्थ कुञ्जी का कार्य करता है। इस समय इस ग्रन्थ के अध्ययन किये विना वेदादि सच्छास्त्रों का सत्य-सत्य अर्थ समझना अति कठिन है। इस को पूर्णतया समझे विना बड़े-बड़े उपाधिधारी दिग्गज विद्वान् भी अनेक अनर्थमयी भ्रान्तियों से लिप्त रहते हैं।
(३) जन्म लेकर मृत्यु-पर्यन्त मानव जीवन की ऐहलौकिक और पारलौकिक समस्त समस्याओं को सुलझाने के लिए यह ग्रन्थ एकमात्र ज्ञान का भण्डार है। (४) ऋषि दयानन्द से पूर्ववर्ती ऋषियों के काल में संस्कृत का व्यापक
रूप में व्यवहार था और वेदों के सत्य अर्थ का ही प्रचार था। उस समय के सभी आर्ष ग्रन्थ संस्कृत भाषा में ही उपलब्ध होते हैं । महाभारत के पश्चात् सत्य वेदार्थ का लोप और संस्कृत का अतिहास हुआ । विद्वानों ने अल्प विद्या और स्वार्थ के वशीभूत होकर जनता को भ्रम में डाला एवं मतवादियों ने बहुत से आर्ष ग्रन्थ नष्ट करके ऋषि-मुनियों के नाम पर मिथ्या ग्रन्थ बनाये उन के ग्रन्थों में प्रक्षेप किया जिस से सत्यविज्ञान का लोप हुआ। उस नष्ट हुए विज्ञान को महर्षि ने इस ग्रन्थ में प्रकट किया है। महर्षि ने इस ग्रन्थ में बहुमूल्य मोतियों को चुनचुनकर आर्यभाषा में अभूतपूर्व माला तैयार की जिस से सर्वसाधारण शास्त्रीय सत्य मान्यताओं को जानकर स्वार्थी विद्वानों के चंगुल से बच सकें । (५) महर्षि दयानन्द कृत ग्रन्थों में सत्यार्थप्रकाश प्रधान ग्रन्थ है। इस में उनके सभी ग्रन्थों का सारांश आ जाता है।

(६) यह ही एक ऐसा ग्रन्थ है जो पाठकों को इस ग्रन्थ में प्रतिपादित सर्वतन्त्र, सार्वजनीन, सनातन मान्यताओं के परीक्षण के लिए आह्वान देता है।

(७) इसके पढ़े बिना कोई भी आर्य ऋषि के मन्तव्यों और उनके कार्यक्रमों को भली प्रकार नहीं समझ सकता एवम् अन्यों के उपदेशों में प्रतिपादित मिथ्या सिद्धान्तों को नहीं पहचान सकता । जिससे अनेक भ्रान्त धारणाएं मस्तिष्क में बैठ जाती हैं जिनके निराकरण के लिए इस ग्रन्थ का अनेक बार अध्ययन सर्वथा अनिवार्य है।

(८) इसके प्रारम्भ में त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म वदिष्यामि' इत्यादि से जो प्रतिज्ञा की हैं उसी के अनुसार सम्पूर्ण ग्रन्थ में सत्यार्थ का प्रकाश करते हुए अन्त में प्रतिज्ञा का उपसंहार किया है।

(९) अत्यन्त समृद्धिशाली, सर्वदेशशिरोमणि भारत देश का पतन किस कारण से हुआ एवम् उत्थान किस प्रकार हो सकता है, इस विषय पर इस ग्रन्थ में पूर्ण प्रकाश डाला गया है।

(१०) इस में आर्यसमाज और मत-मतान्तरों के अन्तर को अनेक स्थानों पर एवम् एकादश समुल्लास में विशेष रूप से खोलकर समझाया गया है। (११) मानव जाति के पतन का कारण मतवादियों की मिथ्या धारणाएं हैं जिनका खण्डन भी प्रमाण और युक्तिपूर्वक इस में किया गया है ।

(१२) इसमें मूल दार्शनिक सिद्धान्तों को ऐसी सरल रीति से समझाया गया है कि जिसे पढ़कर साधारण शिक्षित व्यक्ति भी एक अच्छा दार्शनिक बन सकता है। जिस ने इस ग्रन्थ को न पढ़कर नव्य महाकाव्य अनार्ष ग्रन्थों के आधार पर दार्शनिक सिद्धान्तों को पढ़ा है उस की मिथ्या धारणाओं का खण्डन और सत्य मान्यताओं का मण्डन इस ग्रन्थ का अध्ययन करने वाला सरलता से कर सकता है।

(१३) ऋषि के मन्तव्यों पर इस ग्रन्थ को पढ़ने से पूर्व जितनी भी शंकाएं किसी को होती हैं। वे सब इस के पढ़ने से समूल नष्ट हो जाती हैं क्योंकि उन सब शंकाओं का समाधान इसमें विद्यमान है ।

(१४) वर्तमान में बने राजनीतिक दल पक्षपात से पूर्ण होने के कारण स्वयं सम्प्रदाय हैं। मतवादियों और उन में शब्दमात्र का भेद है, तत्त्वतः अभेद है। उनके द्वारा साम्प्रदायिकता की बहुत वृद्धि हुई है। इस ग्रन्थ में साम्प्रदायिकता के स्वरूप और उसकी हानियों का यथार्थ दिग्दर्शन है साम्प्रदायिकता को समूल नष्ट करने के उपाय भी इस ग्रन्थ में बताये गये हैं किन्तु खेद है कि दल (सम्प्रदाय) पक्षपात-रहित, मानव के कल्याणकारक ऋषि के पूर्ण सत्य मन्तव्यों को भी साम्प्रदायिक कह कर सम्प्रदाय शब्द के अज्ञानतापूर्ण दूषित अर्थ का प्रचार कर नास्तिकता का प्रचार कर रहे हैं और 'उलटा चोर कोतवाल को दण्डे' वाली कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं।

यह बहुत आश्चर्य है कि आर्यसमाज के नेता भी ऐसे दलों के सदस्य हैं जो मतवादियों और आर्यसमाज में कोई भेद नहीं मानते। 

पुस्तक का नाम/ Name of Book : सत्यार्थ प्रकाश | Satyartha Prakash
पुस्तक के लेखक/ Author of Book : दयानंद सरस्वती - Dayanand Saraswati,
श्रेणी / Categories :  Granth
पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज़ / Size of Book : 1.8 MB
कुल पृष्ठ /Total Pages : 480


 
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