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| बहुरूपी गांधी | BAHUROOP GANDHI |
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| बहुरूपी गांधी | BAHUROOP GANDHI |
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| भारत विभाजन | Bharat Vibhajan |
धर्मशास्त्रों का बृहद् पाठ भारत की ब्राह्मण परंपरा का अंग है, तथा यह विद्वत्परंपरा की देन एवं एक विशद तंत्र है। इसके गहन न्यायशास्त्रीय विवेचन के कारण प्रारंभिक ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासकों द्वारा यह हिंदुओं के लिए कानून के रूप में माना गया था तब से लेकर आज भी धर्मशास्त्र को हिन्दू विधिसंहिता के रूप में देखा जाता है। धर्मशास्त्र में उपस्थित रिलीजन व कानून के बीच जो अंतर किया जाता है, दरअसल वह कृत्रिम है और बार-बार उसपर प्रश्न उठाये गये हैं। जबकि कुछ लोग, धर्मशास्त्र में धार्मिक व धर्मनिरपेक्ष कानूनों के बीच अंतर रखा गया है ऐसा पक्ष लेते हैं। धर्मशास्त्र हिन्दू परंपरा में महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि- एक, यह एक आदर्श गृहस्थ के लिए धार्मिक नियमों का स्रोत है, तथा दूसरे, यह धर्म, विधि, आचारशास्त्र आदि से संबंधित हिंदू ज्ञान का सुसंहत रूप है।
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| भारतीय वास्तु शास्त्र | Bharatiy Vastu Shastr |
"भारतीय वास्तु शास्त्र" एक पारंपरिक भारतीय वास्तु विज्ञान है जो प्रकृति के अनुरूप डिजाइन और निर्माण के सिद्धांतों पर केंद्रित है। यह इमारतों के डिजाइन और निर्माण पर अभिविन्यास, कमरों की नियुक्ति, रंगों का उपयोग, प्राकृतिक तत्वों का उपयोग और प्रकृति के पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और अंतरिक्ष) के प्रभाव जैसे विभिन्न पहलुओं को शामिल करता है। पुस्तक इस तथ्य पर जोर देती है कि एक इमारत को इस तरह से डिजाइन और निर्मित किया जाना चाहिए कि यह निवासियों के लिए एक सामंजस्यपूर्ण और सकारात्मक वातावरण प्रदान करे। कुल मिलाकर, "भारतीय वास्तु शास्त्र" पुस्तक पारंपरिक भारतीय वास्तु सिद्धांतों के अनुसार इमारतों के डिजाइन और निर्माण के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करती है, जिसका उद्देश्य उनमें रहने वाले लोगों की भलाई और खुशी को बढ़ावा देना है।
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| कौटिल्य अर्थशास्त्र | Kautilya Arthasastra |