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Monday, October 5, 2020

हिंदी साहित्य का इतिहास | hindi sahitya ka saral itihas

हिंदी साहित्य का इतिहास |  hindi sahitya ka saral itihas
hindi sahitya ka saral itihas


hindi sahitya ka saral itihas :हिंदी साहित्य का इतिहास  के बारे में जानकारी

हिन्दी साहित्य के अब तक लिखे गए इतिहासों में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा लिखे गए हिन्दी साहित्य का इतिहास को सबसे प्रामाणिक तथा व्यवस्थित इतिहास माना जाता है। आचार्य शुक्ल जी ने इसे हिन्दी शब्दसागर की भूमिका के रूप में लिखा था जिसे बाद में स्वतंत्र पुस्तक के रूप में १९२९ ई० में प्रकाशित आंतरित कराया गया। आचार्य शुक्ल ने गहन शोध और चिन्तन के बाद हिन्दी साहित्य के पूरे इतिहास पर विहंगम दृष्टि डाली है।

इतिहास-लेखन में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल एक ऐसी क्रमिक पद्धति का अनुसरण करते हैं जो अपना मार्ग स्वयं प्रशस्त करती चलती है। विवेचन में तर्क का क्रमबद्ध विकास ऐसे है कि तर्क का एक-एक चरण एक-दूसरे से जुड़ा हुआ, एक-दूसरे में से निकलता दिखता है। लेखक को अपने तर्क पर इतना गहन विश्वास है कि आवेश की उसे अपेक्षा नहीं रह जाती।

आदिकाल से लेकर आधुनिक काल तक आचार्य शुक्ल का इतिहास इसी प्रकार तथ्याश्रित और तर्कसम्मत रूप में चलता है। अपनी आरम्भिक उपपत्ति में आचार्य शुक्ल ने बताया है कि साहित्य जनता की चित्तवृत्ति का संचित प्रतिबिम्बित होता है। इन्हीं चित्तवृत्तियों की परम्परा को परखते हुए साहित्य-परम्परा के साथ उनका सामंजस्य दिखाने में आचार्य शुक्ल का इतिहास और आलोचना-कर्म निहित है।

इस इतिहास की एक बड़ी विशेषता है कि आधुनिक काल के सन्दर्भ में पहुँचकर शुक्ल जी ने यूरोपीय साहित्य का एक विस्तृत, यद्यपि कि सांकेतिक ही, परिदृश्य खड़ा किया है। इससे उनके ऐतिहासिक विवेचन में स्रोत, सम्पर्क और प्रभावों की समझ स्पष्टतर होती है।


  • पुस्तक का नाम/ Name of Book :हिंदी साहित्य का इतिहास |  hindi sahitya ka saral itihas
      • पुस्तक के लेखकAuthor of Book :रामचंद्र शुक्ल - Ramchandra Shukla



       

      Tuesday, April 6, 2021

      शरत साहित्य [प्रथम पर्व] : शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय | Sharat Sahitya [Pratham Parv] by Sharatchandra Chattopadhyay

      शरत साहित्य [प्रथम पर्व] : शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय | Sharat Sahitya [Pratham Parv] by Sharatchandra Chattopadhyay

        

      Sharat Sahitya [Pratham Parv] Book in PDF Download

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      Particulars

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       eBook Details (Size, Writer, Lang. Pages

      (आकार, लेखक, भाषा,पृष्ठ की जानकारी)

       पुस्तक का नाम (Name of Book) 

       शरत साहित्य [प्रथम पर्व] | Sharat Sahitya [Pratham Parv] 

       पुस्तक का लेखक (Name of Author) 

       शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय - Sharatchandra Chattopadhyay

       पुस्तक की भाषा (Language of Book)

       हिंदी (Hindi) 

       पुस्तक का आकार (Size of Book)

        6 MB

        कुल पृष्ठ (Total pages )

       156

       पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)

       साहित्य / Literature





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      Tuesday, July 7, 2020

      तांत्रिक साहित्य | Tantrik Sahitya Hindi PDF Book Download

      तांत्रिक साहित्य  | Tantrik Sahitya  Hindi PDF Book  Download
      तांत्रिक साहित्य

      Tantrik Sahitya Hindi PDF Book :तांत्रिक साहित्य 


      पुस्तक का नाम :तांत्रिक साहित्य | Tantrik Sahitya 

      पुस्तक के लेखक : गोपीनाथ कविराज |Gopinath Kaviraj

      पुस्तक की श्रेणी : तंत्र - मंत्र (Tantra-Mantra),हिन्दी

      पुस्तक का साइज :  427MB

      कुल पृष्ठ : 801

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      Saturday, April 3, 2021

      संस्कृत साहित्य नालचरितम् : डॉ इच्छाराम द्विवेदी | Sanskrit Sahitye Nala Charitam by Dr. Ichcha Ram Dwivedi

      संस्कृत साहित्य नालचरितम् : डॉ इच्छाराम द्विवेदी | Sanskrit Sahitye Nala Charitam by Dr. Ichcha Ram Dwivedi

       Sanskrit Sahitye Nala Charitam Book in PDF Download


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      Particulars

      (विवरण)


       eBook Details (Size, Writer, Lang. Pages

      (आकार, लेखक, भाषा,पृष्ठ की जानकारी)

       पुस्तक का नाम (Name of Book) 

       संस्कृत साहित्य नालचरितम् | Sanskrit Sahitye Nala Charitam 

       पुस्तक का लेखक (Name of Author) 

       डॉ इच्छाराम द्विवेदी |Dr. Ichcha Ram Dwivedi

       पुस्तक की भाषा (Language of Book)

       हिंदी (Hindi) 

       पुस्तक का आकार (Size of Book)

       143.6 MB

        कुल पृष्ठ (Total pages )

       342

       पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)

      Education



       

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      Thursday, November 12, 2020

      हिंदी का सामयिक साहित्य -भारतेन्दु हरिचन्द्र - | Hindi Ka Samyik Sahitya by Bharatendru Harichandra

      हिंदी का सामयिक साहित्य | Hindi Ka Samyik Sahitya
      हिंदी का सामयिक साहित्य -भारतेन्दु हरिचन्द्र -  | Hindi Ka Samyik Sahitya by Bharatendru Harichandra
    • पुस्तक का नाम/ Name of Book :हिंदी का सामयिक साहित्य | Hindi Ka Samyik Sahitya
      • पुस्तक के लेखकAuthor of Book : भारतेन्दु हरिचन्द्र - Bharatendru Harichandra
      • श्रेणी / Categories : साहित्य / Literature
      • पुस्तक की भाषा / Language of Book : Hindi (हिंदी)
      • पुस्तक का साइज़ / Size of Book : 10.12  MB
      • कुल पृष्ठ /Total Pages : 251


         


         

        Saturday, November 14, 2020

        बाल साहित्य - रवीन्द्रनाथ टैगोर | BAL SAHITYA by Ravindranath Tagore

        बाल साहित्य | BAL SAHITYA

        बाल साहित्य - रवीन्द्रनाथ टैगोर | BAL SAHITYA by Ravindranath Tagore

         
      • पुस्तक का नाम/ Name of Book :बाल साहित्य | BAL SAHITYA
        • पुस्तक के लेखकAuthor of Book : रवीन्द्रनाथ टैगोर - Ravindranath Tagore
        • श्रेणी / Categories : बाल पुस्तकें / Children
        • पुस्तक की भाषा / Language of Book : Marathi |मराठी
        • पुस्तक का साइज़ / Size of Book : 4 MB
        • कुल पृष्ठ /Total Pages : 114


           

          Saturday, January 30, 2021

          सूर साहित्य | Sur Sahitya PDF Download

           

          सूर साहित्य | Sur Sahitya

          सूर साहित्य | Sur Sahitya PDF Download

          सूरदास की जीवनी

          जीवन की छोटी-मोटी बातों को सम्हाल कर रखने और उन्हें श्रात्म- कथा का रूप देकर काल की गाँठ में बांधने की परिपाटी हमारे यहाँ प्रचलित नहीं हुई। इसके कई कारण हैं। अन्य देशों के मनीषियों की भाँति ऊपर की चमक-दमक और ऐहिक ऐश्वर्य से भारतीय विचारक प्रसन्न नहीं हुए। वे उन वस्तुओं पर अधिक बल देते रहे जिनका संबध मनुष्य की देह से कम, उसकी मनस्चेतना और आत्मा से अधिक या | क्षण क्षण की बातों का हिसाब देना उन्हे नहीं आया । दूसरे, वे अत्यन्त नम्र थे। वे सभी ऊँचे दर्जे के तत्त्वदर्शी ये जो अपने को महत्व देना जानते ही नहीं थे। हमारे कवियों ने अवतारों की कथा गाई, लोक-जीवन संबंधी महान आदर्शों को सब के सामने रक्खा । वे जिन चरित्रों की कथाये गाया करते ये वे इतने उच्च ये कि उनके निर्माताओं को उनके सामने अपने जीवन की विज्ञप्ति की बात सूझी ही नहीं।

          यदि हम सूरदास की जीवनी के लिए कुछ खोज करते हैं तो हमें इन आधारों की शरण लेनी पड़ती है :-

          १-आत्मनिवेदन संबंधी पद ।

          २-सूरदास के कूट पद ।

          ३-किंवदंतियों।

          ४-इतिहासकारों और अन्य समकालीन लेख

          उल्लेख ।

           

          पुस्तक का नाम/ Name of Book : सूर साहित्य | Sur Sahitya
          पुस्तक के लेखक/ Author of Book :  रामरतन भटनागर - Ramratan Bhatnagar
          श्रेणी / Categories :  जीवनी / Biography
          पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी | Hindi
          पुस्तक का साइज़ / Size of Book : 7 MB
          कुल पृष्ठ /Total Pages : 306


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          Saturday, May 7, 2022

          आयुर्वेदीय हितोपदेश - हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक | Ayurveda Hitopdesh - Hindi PDF Book

          आयुर्वेदीय हितोपदेश - हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक | Ayurveda Hitopdesh - Hindi PDF Book

          Some Excerpts From the Book Ayurveda Hitopdesh 

          By writing this book named “Ayurveda Hitopadesh”, Vaidya Ranjit Raiji has done a great favor to Ayurvedic students and teachers. Rigveda is very ancient in the entire Vedic literature. Vaidya Ranjit Raiji has authored this essay titled "Ayurvedic Hitopadesh" by selecting all those Vaktarats that he found most suitable for the study of Ayurveda. By studying this essay, students will have great ease in the study of Ayurveda.

          Knowledge of Sanskrit is necessary for the revelation of Ayurveda, it is universally agreed. In this way, not only Ayurveda, even the Vedas have been translated into foreign languages ​​and with their help, the subjects propounded in these can be known; however, it is always possible that translations may reflect the thoughts and understanding of the translator. Therefore, it is considered more appropriate to read the texts in the original language as far as possible in Vidya and Kalamatra. This truth is special in Ayurveda.

          To enable the students to understand the original texts themselves, either their Sanskrit knowledge should be of excellent quality or there should be a Sanskrit in the text subjects or they should be taught only by keeping the original texts of Ayurveda in front, these are alternative measures. Due to the involvement of Western medicine in the curricular subjects, it has become necessary to take the students after acquiring the basic knowledge of that subject. As a result, the first option has not been feasible. The last third option is also not possible due to the fact that the curriculum has now become subject-oriented, so it has become preferable to rely on the corresponding lectures and textbooks. Since the remaining second option is feasible, Sanskrit has been kept as a subject in the syllabus everywhere.

          In this way, texts like Hitopadesha, Panchatantra, Dashkumarcharit, Shakuntal etc. have been prescribed in the Sanskrit subject of the syllabus. These texts are often incomprehensible to the students, due to their lack of direct relation with Ayurveda, both the student and the teacher are often not interested in their study and teaching.

          By clicking on the link given below, you can download the written book Ayurveda Hitopdesh in PDF.

          आयुर्वेदीय हितोपदेश पुस्तक के कुछ अंश

          “आयुर्वेदीय हितोपदेश" नाम की यह पुस्तक लिखकर वैद्य रणजितरायजी ने आयुर्वेदीय छात्रों तथा अध्यापकों का बड़ा उपकार किया है। सम्पूर्ण वैदिक साहित्य में अत्यन्त प्राचीन ऋग्वेद है। उस ऋग्वेद से लेकर अद्ययावत् जो आयुर्वेदीय साहित्य उपलब्ध है, उस सब साहित्य का आलोडन और मन्थन करके उसमें से जो वाक्यरत्न आयुर्वेद के अध्ययन के लिए अत्यन्त उपयुक्त उन्हें प्राप्त हुए, उन सब को चुनकर वैद्य रणजितरायजी ने इस "आयुर्वेदीय हितोपदेश” नामक निबन्ध को ग्रंथित किया है। इस निबन्ध के अध्ययन से छात्रों को आयुर्वेद के अध्ययन में बड़ी सुगमता होगी।

          आयुर्वेद के रहस्यवबोधन के लिये संस्कृत का ज्ञान आवश्यक है, यह सर्ववादिसंमत है। यों आयुर्वेद के ही नहीं, वेदों तक के देशी-विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुके हैं और उनकी सहायता से इनमें प्रतिपादित विषयों को जाना जा सकता है; तथापि यह सर्वदा संभव है कि अनुवादों में अनुवादक के विचारों और समझ की छाप आ जाय। अतएव विद्या और कलामात्र में यथाशक्य ग्रन्थों को मूल भाषा में पढ़ना अधिक उपयुक्त समझा जाता है। आयुर्वेद पर यह सच्चाई सविशेष घटित होती है।

          विद्यार्थी स्वयं मूल ग्रन्थों को समझ सके इस निमित्त या तो उनका संस्कृत ज्ञान उत्तम कोटि का होना चाहिए या पाठ्य विषयों में एक संस्कृत हो या फिर उन्हें आयुर्वेद के मूल-ग्रन्थों को सामने रखकर ही पढ़ाया जाय, ये वैकल्पिक उपाय हैं। पाठ्य विषयों में प्रायः पाश्चात्य चिकित्सा भी अन्तर्भावित होने से उस विषय का आधारभूत ज्ञान ग्रहण किए विद्यार्थी लेना आवश्यक हो गया है। परिणामतया, प्रथम विकल्प शक्य नहीं रहा है। अन्तिम तृतीय विकल्प भी इस कारण शक्य नहीं है कि पाठ्यक्रम अब विषय-प्रधान हो गया है अतः तदनुरूप व्याख्यानों और पाठ्य ग्रन्थों का ही अवलम्बन करना श्रेयस्कर हो गया है। शेष द्वितीय विकल्प ही साध्य होने से सर्वत्र पाठ्यक्रम में संस्कृत एक विषय के रूप में रखा गया है।

          इस प्रकार पाठ्यक्रम के अंगभूत संस्कृत विषय में हितोपदेश, पञ्चतन्त्र, दशकुमारचरित, शाकुन्तल आदि ग्रन्थ निर्धारित किये गये हैं। ये ग्रन्थ विद्यार्थियों के लिए प्रायः दुर्बोध होने से अपरंच इनका साक्षात् सम्बन्ध आयुर्वेद से न होने से इनके अध्ययन और अध्यापन में विद्यार्थी और अध्यापक दोनों की रुचि प्रायः नहीं होती।

          नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके, आप लिखित पुस्तक आयुर्वेदीय हितोपदेश पीडीएफ में डाउनलोड कर सकते हैं। 


          Particulars

          (विवरण)


           eBook Details (Size, Writer, Lang. Pages

          (आकार, लेखक, भाषा,पृष्ठ की जानकारी)

           पुस्तक का नाम (Name of Book) 

          सुकवि - समीक्षा | Ayurveda Hitopdesh PDF

           पुस्तक का लेखक (Name of Author) 

          वैद्य रणजित राय देसाई / Vaidhy Ranjit Rai Desai

           पुस्तक की भाषा (Language of Book)

          Hindi

           पुस्तक का आकार (Size of Book)

          76 MB

            कुल पृष्ठ (Total pages )

           298

           पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)

          Ayurveda books


           
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          Thursday, July 8, 2021

          Viram Chinh | विराम चिन्ह By Ramdhari Singh Dinkar Free Book PDF

           Viram Chinh PDF

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          By clicking on the link given below, you can download the written book Viram Chinh in PDF.

          विराम चिन्ह हिंदी किताब करें पीडीएफ में डाउनलोड

          एक विकासशील भाषा के साहित्य की प्राकृतिक धारा जैसे-जैसे तीव्र गति से आगे बढ़ती है, वह रास्ते में विभिन्न दिशाओं से विभिन्न भावनाओं और विचारों के मधुर और महान स्रोतों का स्वागत करती है। और वह धारा अपनी स्वाभाविक उदारता से उन्हें अपने में समा लेती है, बिना रुके आगे बढ़ती रहती है। यह किसी भाषा के सजीव साहित्य के विकास की शाश्वत कहानी है। संस्कृत भाषा में अन्य भाषाओं के विचार, विज्ञान और कला की ऐसी कोई शाखा नहीं है और न ही हो सकती है, इसका एकमात्र कारण इसकी ग्रहणशीलता रही है। वहाँ भी हम देखते हैं कि कुछ दिनों तक इसकी धारा में एकरूपता रहती है, फिर धीरे-धीरे इसका रूप बदल जाता है। इस तरह इसमें कई मोड़ हैं, कभी काल की छाती पर अपनी अमिट छाप छोड़ती रही है, कभी धैर्य से तो कभी तेज गति से, और अगर पीछे मुड़कर देखें तो उसका उद्गम कहीं दिखाई देता है। अनंत, चीजों की अनंतता में विलीन हो जाना। हिन्दी साहित्य की धारा को हम यहाँ से वहाँ तक एक नज़र में देख सकते हैं, इसके विकास की धारा उतनी पुरानी नहीं है। फिर भी, उसी अवधि में इसका विविध विकास निश्चित रूप से आश्चर्यजनक है।Viram Chinh Pdf Download free, विराम चिन्ह पीडीऍफ़ डाउनलोड करें , Books By Ramdhari Singh Dinkar, Ramdhari Singh Dinkar की किताबें डाउनलोड करें , Viram Chinh book in hindi free download, विराम चिन्ह हिंदी में डाउनलोड करें फ्री

          नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके, आप  लिखित पुस्तक विराम चिन्ह हिंदी पीडीएफ में डाउनलोड कर सकते हैं।


          Particulars

          (विवरण)


           eBook Details (Size, Writer, Lang. Pages

          (आकार, लेखक, भाषा,पृष्ठ की जानकारी)

           पुस्तक का नाम (Name of Book) 

           Viram Chinh | विराम चिन्ह 

           पुस्तक का लेखक (Name of Author) 

           रामधारी सिंह 'दिनकर' / Ramdhari Singh Dinkar

           पुस्तक की भाषा (Language of Book)

           हिंदी (Hindi) 

           पुस्तक का आकार (Size of Book)

            8 MB

            कुल पृष्ठ (Total pages )

           87

           पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)

           काव्य / Poetry



           


           

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